पारिस्थितिकी तन्त्र को अनुकूलन बनाने के लिए पर्यावरण में जीव जन्तुओं, वनस्पति, वायु एवं पानी का संतुलन होना अति आवश्यक हैः जिलाधिकारी

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 भारत सरकार द्वारा आयोजित भारतीय जीव जन्तु कल्याण बोर्ड, वन एवं पर्यावरण पर दो दिवसीय कार्यशाला में आम्र्ड ट्रेनिंग सेंटर, पी.ए.सी. सुभाष नगर में जिलाधिकारी हरबंस सिंह चुघ ने बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग करते हुए कहा कि पारिस्थितिकी तन्त्र को अनुकूलन बनाने के लिए पर्यावरण में जीव जन्तुओं, वनस्पति, वायु एवं पानी का संतुलन होना अति आवश्यक है। लेकिन आज पर्यावरण में असन्तुलन के कारण कई वन्य जीव विलुप्त हो चुके हैं जबकि कुछ विलुप्त होने के कगार पर हैं। आज आवश्यकता है कि इन वन्य जीवों का संरक्षण कर इन्हें विलुप्त होने से बचाया जाए। जिलाधिकारी ने कहा कि मनुष्य ने अपनी सुविधा के लिए बुद्धि का प्रयोग कर अपना आधिपत्य स्थापित करते हुए पर्यावरण में असन्तुलन की स्थिति पैदा कर दी है। जिस कारण वन, वन्य जीव जन्तुओं, नदी एवं वायु को क्षति पहंुच रही है। जिलाधिकारी ने इस दो दिवसीय प्रशिक्षण में प्रतिभाग कर रहे पुलिस एवं अन्य विभागों के प्रशिक्षणार्थियों को जीव, जन्तु कल्याण वन बोर्ड एवं वन पर्यावरण पर इस गोष्ठी में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम एवं गौवंश संरक्षण अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों एवं धाराओं के बारे में अच्छी तरह से जानकारी प्राप्त कर लें। उन्होंने कहा कि इन प्रावधानों की पूर्ण जानकारी रखें एवं उसमें अपनी सहभागिता को देखकर इम्प्लीमेंटेशन करेंगें तो यह कार्यशाला सफल सिद्ध होगी। इस अवसर पर एनिमल वेलफेयर लाॅ पर प्रशिक्षण दे रहे एन.जी. जयसिम्हा ने प्रशिक्षणार्थयों को पावर प्वाइंट प्रजेन्टेशन के माध्यम से पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 एवं गौवंश सरंक्षण अधिनियम 2007 के विभिन्न प्रावधानों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यशाला में भारतीय जन्तु कल्याण बोर्ड के सदस्य गौरी मौलेखी, एन.जी. जयसिम्हा, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डाॅ एम. एस. नयाल, प्रभारी अधिकारी उत्तराखण्ड पशु कल्याण बोर्ड, डाॅ आशुतोश जोशी, सी.ओ. सदर राजीव मोहन, डिप्टी सी.वी.ओ. डाॅ रमन चोपड़ा, कुलदीप सूर्यवंशी, मामचन्द एवं प्रशिक्षणार्थी उपस्थित थे।

 

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