पंचायत प्रमुखों, ज्येष्ठ उप प्रमुखों एवं कनिष्ठ उप प्रमुखों के पद के निर्वाचन में निर्वाचक की निरक्षरता, अन्धता या अन्य अशक्तता के कारण निर्वाचन अधिकारी के समाधान के पश्चात निर्वाचक को मतदान में सहायता के लिए सहायक उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में

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जिला मजिस्ट्रेट/ जिला निर्वाचन अधिकारी हरिद्वार हरबंस सिंह चुघ ने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार क्षेत्र पंचायत प्रमुखों, ज्येष्ठ उप प्रमुखों एवं कनिष्ठ उप प्रमुखों के पद के निर्वाचन में निर्वाचक की निरक्षरता, अन्धता या अन्य अशक्तता के कारण निर्वाचन अधिकारी के समाधान के पश्चात निर्वाचक को मतदान में सहायता के लिए अपने साथ एक सहायक/साथी को ले जाने का प्राविधान है। ऐसे निर्वाचक (मतदाता) को जो सहायक की मांग करने वाला हो को निर्वाचक साक्षर है या निरक्षर इसके सत्यापन हेतु उसके द्वारा दाखिल सपथ पत्र से होगा जो नोटरी से सत्यापित होना अनिवार्य है। यदि निर्वाचक अन्धता या अन्य अशक्तता के कारण सहायक की मांग करे तो उसे जनपद के मुख्य चिकित्साधिकारी/ मुख्य चिकित्सा अधीक्षक का यह प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा कि वह अन्धता या अन्य अशक्तता से इस स्तर तक ग्रसित है कि वह मतदान करने में अक्षम है। यदि किसी निर्वाचक को सहायक/साथी दिया जाए तो यह सुनिश्चित किया जाए कि वह 21 वर्ष से कम आयु का न हो, इतना साक्षर हो कि मतपत्र को पढ़ सकने तथा उस पर निर्वाचक की इच्छानुसार उसकी ओर से मत अभिलिखित कर सकने और यदि आवश्यक हो तो मत को छिपाने के लिए मतपत्र को मोड़ने और उसे मतपेटी में डालने में समर्थ हो। सहायक एवं साथी निर्विवाद होना चाहिए और प्रश्नगत निर्वाचन में एक से अधिक निर्वाचक/ सदस्य के साथी के रूप में कार्य करने के लिए अर्ह नहीं होगा। क्षेत्र पंचायत के प्रमुख एवं उप प्रमुखों के पदों के निर्वाचन में सम्बन्धित क्षेत्र पंचायत के सदस्य (निर्वाचक) को अपनी निरक्षरता, अन्धता या अन्य अशक्तता के कारण सहायक की मांग करने की दशा में जिला निर्वाचन अधिकारी/ उप जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष प्रश्नगत निर्वाचन के मतदान के प्रारम्भ होने के 72 घण्टे पूर्व अर्थात् 05 जून 2016 को प्रातः 10ः00 बजे तक सपथ पत्र, प्रमाण पत्र एवं अभिलेखीय साक्ष्य प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। यदि निर्वाचक द्वारा सहायक साथी की मांग हेतु प्रस्तुत साक्ष्य एवं तथ्यों को छुपाना प्रथम दृष्टिया साबित हो तो ऐसे व्यक्ति/ व्यक्तियों के विरूद्ध भारतीय दण्ड संहिता के अन्तर्गत आपराधिक कृत्यों के लिए थानों में प्राथमिकी (एफ.आई. आर.) भी दर्ज करायी जा सकती है। निर्वाचन में निर्वाचकों की पहचान हेतु फोटो पहचान पत्र लाना आवश्यक है, यदि किसी निर्वाचक के पास पहचान पत्र उपलब्ध न हो तो ऐसी दशा में आयोग द्वारा दिये गये दस्तावेज में से कोई एक दस्तावेज लाना आवश्यक होगा।

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