प्रेस दिवस पर पत्रकारों ने की आजादी से लेकर नोटों के सर्जिकल स्ट्राइक पर चर्चा, उत्तराखंड के दूरस्थ क्षेत्रों के पत्रकारों को भी सम्मानित करने की मांग उठाई

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प्रेस दिवस पर पत्रकारों ने की आजादी से लेकर नोटों के सर्जिकल स्ट्राइक पर चर्चा

प्रेस दिवस पर पत्रकारों ने की आजादी से लेकर नोटों के सर्जिकल स्ट्राइक पर चर्चा, उत्तराखंड के दूरस्थ क्षेत्रों के पत्रकारों को भी सम्मानित करने की मांग उठाई : 16 नवंबर, 2016 आज यहां जिला सूचना कार्यालय की पहल पर राष्ट्रीय प्रेस दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित गोष्ठी में पत्रकारों ने वर्तमान समय में पत्रकारिता की दिशा और दशा समेत आपरेशन सर्जिकल स्ट्राइक तथा नोटों की सर्जिकल स्ट्राइक पर गंभीरता से चर्चा की। उन्होंने विभिन्न सामाजिक मुद्दों को समाज के समाने रखने के लिए भारतीय प्रेस परिषद से दूर दराज के पत्रकारों को भी सम्मानित करने की बात कही। कहा कि राष्ट्रीय स्तर व क्षेत्रीय स्तर पर लोगों को जागरूक करने, सरकार व प्रशासन के सामने जनता की मूलभूत समस्याओं को रखने आदि के लिए क्षेत्रीय पत्रकार भी राष्ट्रीय पत्रकारों के बराबर ही कार्य करता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता व संचालन करते हुए जिला सूचना अधिकारी प्रकाश सिंह भंडारी ने मौजूदा समय में पत्रकारों की भागीदारी को अहम बताया। कहा कि पत्रकार सरकार व समाज के बीच दर्पण का कार्य करता है। इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार जीपी सेमवाल, अनिल बहुगुणा, त्रिभुवन उनियाल, नागेंद्र उनियाल आदि ने वर्तमान समय में पत्रकारिता को व्यवसाय बनाने वाले पत्रकारों से सचेत किया। कहा कि ऐसे लोग पत्रकारिता व समाज के लिए घातक हो सकते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय प्रेस परिषद की स्थापना व उद्देश्यों पर रोशनी डाली। कहा कि पत्रकारों की हर समस्या के समाधान के लिए प्रेस परिषद की स्थापना की हुई है। इसके अलावा पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पत्रकारों को सम्मानित करने का भी प्राविधान है। उन्होंने नई पीढ़ी के पत्रकारों को उनके कार्यों व कत्र्तव्यों के बारे में बताया। पत्रकारिता के क्षेत्र में भविष्य बनाने वाले नये पत्रकारों को उन्होंने और अधिक जागरूक होने पर जोर दिया। उन्होंने देश की आजादी से लेकर भारतीय सेना की ओर से पाक अधिकृत कश्मीर में की गई सर्जिकल स्ट्राइल तथा हाल ही में की नोटों पर हुई सर्जिकल स्ट्राइक पर गंभीरता से चर्चा की। वरिष्ठ पत्रकारों ने 1857 में देश की आजादी तथा 1994 में उत्तराखंड राज्य के आंदोलन में अपने प्राणों की शहादत देने वाले पत्रकारों को अहम भूमिका की जमकर सराहना की। तो नई पीढ़ी के पत्रकारों ने पत्रकारिता कोे भविष्य बनाने का बेहतर विकल्प बताया। कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार विनोद पोखरियाल, प्रमोद खंडूड़ी आदि ने राष्ट्रीय प्रेस परिषद की ओर से दूरस्थ क्षेत्र के पत्रकारों की लगातार हो रही उपेक्षा को दुर्भाग्यूपर्ण बताया। कहा कि मौजूदा समय के पत्रकारों को समाज की विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद भी राष्ट्रीय प्रेस परिषद की ओर से दूरस्थ क्षेत्रों के पत्रकारों को सम्मानित करने के बजाय मैदानी क्षेत्रों के पत्रकारों को ही तव्वजो दी जा रही है। उन्होंने कहा कि आज ही के दिन देश की राजधानी दिल्ली में कई पत्रकारों को सम्मानित किया जा रहा है। जबकि जून 2013 की केदारनाथ आपदा के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों के विभिन्न पत्रकारों में बेहतरीन रिर्पोटिंग की। जिसे देश के साथ साथ पूरी दुनिया ने लाइव देखा। बावजूद इसके राष्ट्रीय प्रेस परिषद की ओर से उन पत्रकारों को आज तक सम्मानित नहीं किया गया। उन्होंने उत्तराखंड के आपदा प्रभावित जिलों में उत्कृष्ट रिर्पोटिंग करने वाले पत्रकारों को भी सम्मानित करने की मांग उठाई। इस मौके पर गुरूवेंद्र नेगी, हेमवती नंदन भट्ट, अनिल भट्ट, राकेश रमण शुक्ला, यशवंत सिंह, भगवान सिंह, मनोहर बिष्ट, दीपक बड़वाल, मानवेंद्र कंडारी, पंकज रावत, प्रदीप नेगी, मुकेश आर्य, सिद्धांत उनियाल, पंकज घिल्डियाल, जगदंबा प्रसाद समेत सूचना कार्यालय के सहायक लेखाकार एमएमएल आर्य, मुकेश चंद्र, हरेंद्र कुमार उपस्थित रहे। प्रेस दिवस पर पत्रकारों ने की आजादी से लेकर नोटों के सर्जिकल स्ट्राइक पर चर्चा

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