जनपद के हवालबाग, लमगड़ा व धौलादेवी के 37 कारीगरों (लौहकला) को बायो ब्रिकेट/पिरुल के कोयले से जलने वाले धूम्ररहित चूल्हे के निर्माण की तकनीकी प्रशिक्षण की शुरूआत

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जनपद के हवालबाग, लमगड़ा व धौलादेवी के 37 कारीगरों
जनपद के हवालबाग, लमगड़ा व धौलादेवी के 37 कारीगरों

Hwalbag district, Lmgdha and Duladevi 37 artisans (Luhkla) bio-briquettes / Pirul smokeless coal-fired stove the introduction of technical training building : पर्वतीय क्षेत्रों मे वनाग्नि को रोकने के लिये बायो ब्रिकेट/पिरुल के कोयले से जलने वाले धूम्ररहित चूल्हे के निर्माण को हमें प्राथमिकता देनी होगी यह विचार जिलाधिकारी सविन बंसल ने जिला प्रशासन, विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा एवं पं गोविन्द बल्लभ पंत पर्यावरण संस्थान के सहयोग से विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा के हवालबाग कैम्पस में आज जनपद के हवालबाग, लमगड़ा व धौलादेवी के 37 कारीगरों (लौहकला) को बायो ब्रिकेट/पिरुल के कोयले से जलने वाले धूम्ररहित चूल्हे के निर्माण की तकनीक का प्रशिक्षण की शुरूआत करते हुये रखे। जिलाधिकारी ने कहा कि स्वयं सहायता समूह के माध्यम से इस तकनीक का विकास किया जायेगा ताकि अधिकाधिक लोग इस चूल्हे का प्रयोग कर सके। यह चूल्हा धूम्ररहित होने के साथसाथ खाना बनाने व अंगीठी सेकने के कार्य में लाया जायेगा। जिलाधिकारी ने बताया कि एक दिवसीय प्रशिक्षण में प्रतिभाग करने वाले प्रशिणार्थियों को आनेजाने सहित निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है जिस वहन प्रसार प्रशिक्षण केन्द्र हवालबाग व विवेकानन्द कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा किया जायेगा। उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा कि जनपद के इन तीन ब्लाकों में यह कार्यक्रम सफल रहने के बाद अन्य ब्लाकों सहित जनपद के समीपस्थ जिलों में भी इसे चलाया जायेगा। जिलाधिकारी ने कहा कि पिरूल से बनने वाले ब्रिकेट का प्रशिक्षण हवालबाग ब्लाक के 08 ग्रामों में पं0 गोविन्द बल्लभ पंत हिमालयन पर्यावरण संस्थान द्वारा दिया जा रहा है और उनके द्वारा बनाये गये ब्रिकेट को अभी उक्त संस्थान क्रय कर रहा है। यह चूल्हा बन जाने के बाद सर्वप्रथम जनपद के सरकारी कार्यालयों में चूल्हा सहित ब्रिकेट क्रय किया जायेगा उसके बाद अन्य स्थानों पर इस विक्रय हेतु रखा जायेगा जिसकी शुरूआत कलैक्ट्रेट व विकास भवन से की जायेगी। इसके बन जाने से जहां एक ओर पुरूषों व महिलाओं को रोजगार मिलेगा वही दूसरी ओर आर्थिकी की ओर भी कदम बढे़गे और वनों को आग से बचाया जायेगा। चूल्हे के निर्माण की तकनीक के प्रशिक्षण के उपरान्त ग्राम्य विेकास विभाग द्वारा विभिन्न महिला स्वयं सहायता समूहों को पीरुल से कोयला/ब्रिकेट बनाने हेतु जोड़ा जायेगा जिससे कि चूल्हे हेतु ईंधन की उपलब्धता हो सके। इस प्रयोग से एक ओर जहाँ वनों में आग लगने के खतरे को कम किया जा सकेगा वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोग रोजगार सृजन कर अपनी आर्थिकी को भी मजबूत कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि पिरूल को इकठा करने के लिये कलैक्शन सेन्टर बनाये गये है वही पर लोग अपनी सुविधा अनुसार पिरूल को जमा कर सकते है। जिलाधिकारी ने प्रशिक्षणर्थियों से कहा कि उन्हें इसके लिये जो भी सामग्री की आवश्यकता पडेगी उसको सुलभता से उपलब्ध कराने का प्रयास प्रशासन द्वारा किया जायेगा। जिलाधिकारी ने इस अवसर पर निदेशक विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान व उनके सहयोगियों द्वारा दिये जा रहे सहयोग के प्रति अभार व्यक्त किया। इस अवसर पर निदेशक विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान डा0 ए0 पटनायक ने कहा कि जब मेरे द्वारा संस्थान का कार्यभार ग्रहण किया गया था तभी से मेरे मन में पिरूल का सतप्रयोग हो सके उस पर कार्य करना होगा। विगत दिनों अपने अनेक राज्यों के भ्रमण के दौरान मैंने विवेक चूल्हा को दिखा और में उसे अपने साथ ले आया। यह बात मैंने जिलाधिकारी को बतायी तो उन्होंने इस सोच का स्वागत करते हुये पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया जिसके परिणाम स्वरूप आज यह प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न हो सका। प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण देते हुये सेवानिवृत्त तकनीकी अधिकारी शिव सिंह खेतवाल ने बताया कि यह चूल्हा सामग्री उपलब्ध रहने पर एक दिन में तैयार हो जाता है। इसके लिये सबसे आवश्यक वेल्डिंग मशीन की आवश्यकता है तभी यह कार्य जल्दी से सम्पन्न हो पायेगा। इंजीनियर श्याम नाथ ने भी प्रशिक्षण दिया। इस अवसर पर वैज्ञानिक जे0के0एस0 रावत, आपदा प्रबन्धन अधिकारी राकेश जोशी, महाप्रबन्धक उद्योग कविता भगत, श्रम प्रर्वतन अधिकारी श्रीमती आशा पुरोहित, सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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