जाट आरक्षण आंदोलन तेज सरकार को दिया अल्टीमेट

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jat andolan jaat aarkshan
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जाट आरक्षण::जंतर-मंतर पर हरियाणा, दिल्ली, यूपी, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और मध्यप्रदेश के जाट समुदाय के हजारों लोगों पहुंचे दिल्ली में डाला डेरा…

जाट आंदोलन: आरक्षण की मांग के साथ जंतर-मंतर पर इकट्ठा हुए जाट

जाट समुदाय के हजारों लोग ४ मार्च को जंतर-मंतर पर धरना देने के लिए इकट्ठा हुए हैं। इनकी मांग है कि इन्हें सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण दिया जाए।कड़ी सुरक्षा बावजूद कई राज्यों से आये जाट समुदाय के हजारों आंदोलनकारियों ने गरुवार को दिल्ली में डेरा डाला।
बुधवार को जाट समुदाय ने असहयोग आंदोलन के तहत अपने लोगों से बिजली तथा पानी के बिल का भुगतान न करने तथा राष्ट्रीय राजधानी को दूध तथा अन्य जरूरी चीजें जैसे सब्जियां आदि की आपूर्ति बंद करने को कहा गया था।गरुवार को जंतर मंतर पर पहुंच कर धरना दिया और प्रदर्शन के बाद गिरफ्तारी दी। .
अखिल भारतीय जाट संघर्ष समिति के बैनर तले जाट समुदाय के हजारों लोग ४ मार्च को जंतर-मंतर पर धरना देने के लिए इकट्ठा हुए हैं।

जाटों ने सरकार को २० मार्च तक दिया अल्टीमेट

सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कोटे से आरक्षण की मांग कर रहे हरियाणा के जाटों ने गुरुवार को दिल्ली में ज़ोरदार प्रदर्शन कर सरकार को 20 मार्च का अल्टीमेटम दिया है.धरना दे रहे जाटों ने गरुवार को दिल्ली में रैली कर २० मार्च से हरियाणा से दिल्ली के लिए पक्के कूच का एलान कर दिया।आंदोलनकारियों ने राष्ट्रपति को दिया ज्ञापन में चेतावनी दी है की उनकी मांगे पूरी न होने पर वे २० मार्च से दिल्ली का राशन,दूध और पानी बन्द कर देंगे। और असहयोग आंदोलन के तहत बिजली के बिल वगैहर भरने बन्द कर देंगे।

हरियाणा सरकार की बड़ी मुश्किलें

जाटों के एलान के बाद हरियाणा सरकार की मुश्किल बढ़ गयी है वही विपक्ष को सरकार के खिलाफ आक्रामक होने का मौका मिल गया। इस मामले पर राजनीति भी तेज भी हो गई है। इंडियन नेशनल लोकदल (आईएनएलडी) के नेता अभय सिंह चौटाला ने कहा कि, ‘कांग्रेस और बीजेपी हरियाणा में जाटों को सरकारी नौकरियों और सरकारी संस्थानों में आरक्षण पर राजनीति करने का प्रयास कर रही हैं। राज्य की बीजेपी सरकार जाट समुदाय की मांगों को पूरा करने में विफल रही है, जबकि उसने पिछले साल इस पर सहमति जताई थी।’

दिल्ली में आंदोलन के बारे पूछने पर आंदोलन की अगुवायी कर रहे यशपाल मलिक ने कहा, ’33 दिन से 10 लाख से ज़्यादा लोग धरने पर बैठे हैं। जब उससे कोई हल नहीं निकला तो हमें मजबूरन दिल्ली में प्रदर्शन कर घेराव की रणनीति घोषित करनी पड़ी।’. उन्होंने कहा कि पिछली फ़रवरी में जाट आंदोलन में हरियाणा के जाट बिरादरी ३० युवक शहीद हुए थे। उनके कातिलों के खिलाफ अभी तक कोई करवाई नही हुयी। आंदोलनकारी रणवीर मलिक ने कहा की आरक्षण का मसला भी कोर्ट में विचारधीन है लेकिन सरकार उसकी सही से पैरवी तक नही की.

जाटों ने जारी की मांगों की सूची:-

  • केंद्रीय स्तर पर देशभर के हिन्दू,मुसलिम,सिख और बिश्नोई जाटों को केंद्र की ओबीसी श्रेणी में शामिल किया जाए। और हरियणा साल्कर द्वारा ६ जातियों को दिए गए आरक्षण को हरियाणा हाई कोर्ट में उचित पैरवी कर बहाल करा कर संसद के इसी सत्र में संविधान की ९ वीं सूचि में डाला जाए।
  • जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान दर्ज सभी मुकदमे को अविलंब वापस लिए जाए।
  • जेल में बन्द युवाओं को तुरंत रिहा जाए।
  • आनदोलन के दौरान शहीदों के आश्रितों को पक्की सरकारी नोकरी दी जाए।
  • आनदोलन के दौरान घायलों को मुआवजा और जो अपँग हो गए हैं उनको भी मुआवजे के साथ पक्की सरकारी नोकरी दी जाए।
  • आंदोलन को लेकर जातीय दुश्मनी फ़ैलाने वाले सांसद राजकुमार सैनी की संसद की आचार समिति से जाँच करा कर उसकी संसद सदस्यता रद्द की जाए। उन पर और उनके साथियों पर आपराधिक धाराओं में केस दर्ज किया जाए।
  • आंदोलन के दौरान जातीय द्वेष फैलाने वाले कर्मचारियों व् अधिकारियों की जाँच करा उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए.

 

 

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